स्टैंडर्ड, लॉग और RAW वीडियो का परिचय

अपने प्रोजेक्ट की आवश्यकताओं, अपने वर्कफ़्लो और वांछित आउटपुट गुणवत्ता के आधार पर स्टैंडर्ड, लॉग और RAW वीडियो फ़ॉर्मैट के बीच चुनना। नीचे हर फ़ॉर्मैट का ओवरव्यू दिया गया है और यह बताया गया है कि इसका उपयोग कब करना चाहिए।
स्टैंडर्ड वीडियो
स्टैंडर्ड वीडियो को कैमरे में प्रोसेस किया जाता है और पहले से लागू रंग, कॉन्ट्रास्ट और अन्य इमेज सेटिंग के साथ दिखने योग्य फ़ाइल के तौर पर डिलीवर किया जाता है। इस श्रेणी में SDR (Rec. 709) और HDR (Rec. 2020, HLG या PQ) वीडियो दोनों ही शामिल हो सकते हैं।
SDR (स्टैंडर्ड डाइनैमिक रेंज)
फ़ायदे : SDR वीडियो सबसे तेज़ वर्कफ़्लो प्रदान करता है क्योंकि किसी रंग ग्रेडिंग की ज़रूरत नहीं होती है। SDR वीडियो में आम तौर पर log या RAW फ़ॉर्मैट की तुलना में छोटे और अधिक प्रबंधन योग्य फ़ाइल आकार होते हैं। यह वीडियो ज़्यादातर डिस्प्ले और प्लैटफ़ॉर्म के साथ संगत होता है।
नुक़सान : SDR वीडियो में सीमित डाइनैमिक रेंज होती है और पोस्ट-प्रोडक्शन में ग़लतियाँ सुधारने के लिए कम विकल्प उपलब्ध होते हैं।
इसका इस्तेमाल कब करें : लाइव इवेंट के कवरेज, न्यूज़ रिपोर्टिंग या रन-एंड-गन शूट जैसे कठोर समय सीमा वाले प्रोजेक्ट के लिए SDR वीडियो का इस्तेमाल करें। SDR वीडियो न्यूनतम पोस्ट-प्रोडक्शन की ज़रूरत वाले सोशल मीडिया या आंतरिक कॉरपोरेट वीडियो के लिए भी उपयोगी होता है। उदाहरण के लिए आप उसी दिन की शादी के वीडियो संपादन के लिए SDR वीडियो चुन सकते हैं।
HDR (हाई डाइनैमिक रेंज)
फ़ायदे : HDR वीडियो, SDR वीडियो की तुलना में ज़्यादा डाइनैमिक रेंज प्रदान करता है, जिससे ज़्यादा चमकदार हाइलाइट और ज़्यादा विस्तृत शैडो की अनुमति मिलती है और व्यापक रंग ग्रेडिंग के बिना रेडी-टू-व्यू कंटेंट मिलता है।
नुक़सान : HDR वीडियो को ठीक तरह से देखने के लिए HDR-सक्षम डिस्प्ले की आवश्यकता होती है और यह log या RAW फ़ॉर्मैट की तुलना में कम पोस्ट-प्रोडक्शन फ़्लेक्सिबिलिटी प्रदान करता है।
इसका इस्तेमाल कब करें : Apple TV+ या YouTube जैसे HDR प्लैटफ़ॉर्म के कॉन्टेंट के लिए या उच्च श्रेणी के कॉरपोरेट और व्यावसायिक प्रोजेक्ट के लिए HDR वीडियो का इस्तेमाल करें। उदाहरण के लिए HDR वीडियो HDR सक्षम डिस्प्ले पर प्रभावी प्राकृतिक दृश्य दिखाने वाली ट्रैवल फ़िल्म के लिए पूरी तरह से सही है।
Log वीडियो
Log फ़ुटेज को स्टैंडर्ड वीडियो की तुलना में ज़्यादा डाइनैमिक रेंज बनाए रखने के लिए लॉगरिद्मिक कर्व का इस्तेमाल करके कैप्चर किया जाता है, जिससे कलर ग्रेडिंग के लिए फ़्लैट और डीसैचुरेटेड इमेज मिलती है।
Final Cut Camera में आप HEVC (H.265) और Apple ProRes के लिए लॉग रिकॉर्डिंग चालू कर सकते हैं। लॉग रिकॉर्ड करने के लिए iPhone 15 Pro या उसके बाद का मॉडल आवश्यक है।
फ़ायदे : Log वीडियो इमेज गुणवत्ता और फ़ाइल आकार के बीच संतुलन बनाता है। चूँकि Log वीडियो हाइलाइट और शैडो में विवरण को बनाए रखता है, इसलिए इससे क्रिएटिव रंग ग्रेडिंग की सुविधा मिलती है।
नुक़सान : Log वीडियो के लिए कलर ग्रेडिंग आवश्यक है क्योंकि प्रोसेस न की गई इमेज म्यूट की गई या “वाश आउट की गई” दिखाई देती है। Log वीडियो में RAW वीडियो की तुलना में कम पोस्ट-प्रोडक्शन फ़्लेक्सिबिलिटी भी पेश की जाती है।
इसका इस्तेमाल कब करें : कॉरपोरेट, डॉक्युमेंट्री या इंडिपेंडेंट फ़िल्म प्रोजेक्ट के लिए Log वीडियो का इस्तेमाल करें जिसमें RAW वीडियो की तुलना में कम डेटा आवश्यकताओं के साथ सिनेमैटिक लुक की आवश्यकता होती है। Log वीडियो बदलती हुई प्रकाश व्यवस्था वाली तेज़ गति की शूटिंग के लिए आदर्श है जहाँ आप अभी भी कलर ग्रेडिंग विकल्प चाहते हैं। उदाहरण के लिए Log वीडियो ब्रांडेड डॉक्युमेंट्री शूट करने के लिए एक अच्छा विकल्प है जहाँ अंतिम समय सीमा महत्वपूर्ण होती है लेकिन आप फिर भी उच्च स्तर का सिनेमैटिक लुक चाहते हैं।
RAW वीडियो
RAW वीडियो पोस्ट-प्रोडक्शन में अधिकतम फ़्लेक्सिबिलिटी के लिए कैमरा सेंसर से मिलने वाली इमेज की सारी जानकारी बनाए रखता है।
फ़ायदे : RAW वीडियो पोस्ट-प्रोडक्शन में ह्वाइट बैलेंस, एक्सपोज़र और रंग को ऐडजस्ट करने में अधिकतम फ़्लेक्सिबिलिटी प्रदान करता है। RAW वीडियो उच्चतम इमेज गुणवत्ता, विवरण और डाइनैमिक रेंज भी प्रदान करता है और यह कई विज़ुअल प्रभावों या कंपोज़िटिंग आवश्यकताओं वाले उच्च-स्तरीय सिनेमैटिक वर्कफ़्लो के लिए आदर्श है।
नुक़सान : RAW वीडियो बहुत बड़े फ़ाइल आकार बनाते हैं जिनके लिए पर्याप्त स्टोरेज क्षमता की आवश्यकता होती है। Final Cut Camera के साथ Apple ProRes RAW रिकॉर्ड करने के लिए बाहरी स्टोरेज आवश्यक है। सीधे बाहरी स्टोरेज डिवाइस पर वीडियो रिकॉर्ड करें देखें।
इसका इस्तेमाल कब करें : फ़ीचर फ़िल्मों, विज्ञापनों या काफ़ी ज़्यादा पोस्ट-प्रोडक्शन या विज़ुअल इफ़ेक्ट वाले किसी भी प्रोडक्शन के साथ-साथ उन स्थितियों में भी RAW वीडियो का इस्तेमाल करें जहाँ आपको हाइलाइट या शैडो को “बचाने” की ज़रूरत पड़ सकती है। उदाहरण के लिए फ़ीचर फ़िल्म के लिए RAW वीडियो का उपयोग करें जिन्हें हाई-कॉन्ट्रास्ट लाइटिंग के साथ शूट किया गया हो जहाँ आप रंग ग्रेडिंग में कुल नियंत्रण चाहते हों।